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ध्यान

आलोक की नियमित गतिविधियों में “ध्यान” को विषेष महत्त्व दिया गया हैं। प्रारम्भ से ही योगसूत्र की पद्वति पर मन को अनुषासन में रखने की विधि का ज्ञान ध्यान के माध्यम से ही छात्रों को सिखाया जाता हैं। बालकों में प्रारम्भ से ही साधारण जागृत अवस्था से उच्चतर अवस्था तक तथा योग चेतना के आन्तरिक संसार की खोज ध्यान के माध्यम से विकसित की जाती हैं। विद्यालय में इस हेतु सुनियोजित प्रयोगषाला एवं वातावरण हम प्रदान करते हैं, जहाँ नियमित ध्यान का अभ्यास कक्षानुसार व कालांष अनुसार होता हैं, साथ ही सप्ताह में एक दिन समूह ध्यान का आयोजन भी होता हैं। प्रत्येक कालांष के मध्य भी दो मिनिट का ध्यान नवचेतना व नवषक्ति का संचार करता हैं।

समूह ध्यान प्रत्येक सप्ताह में एक निष्चित दिन प्रार्थना सभा में खुले सभा स्थल पर विभिन्न विषयों पर वार्ता एवं संगीत के साथ ध्यान यात्रा के माध्यम से बालकों में नवचेतना का संचार होता हैं। इस कार्यक्रम में प्राणायाम, नाडी़ शोधन इत्यादि प्रयोग बताए जाते हैं।

पातंजलि ध्यान केन्द्र

ध्यान का अनुभव प्रत्येक सप्ताह अति सुन्दर कक्ष में प्रषिक्षक के साथ किया जाता हैं। भावातीत, विपस्ना, अष्टांग योग इत्यादि ध्यान बहुत सरलता से बालक करते हैं। शान्त संगीतमय वातावरण में बालक नवषक्ति का अनुभव

हठ-योग प्रयोगषाला

आलोक के नवीन प्रयोगों में से एक हैं- हठयोग प्रयोगषाला जहाँ छात्र-छात्राएँ आधुनिक रूप से विकसित किए गए योग के साधनों से सरल ढंग से योग करने की विद्या को सिखाता

समाज सेवा प्रकल्प

बालक में अन्तर्निहित सृजन एवं विचारों को, भावों को छिपी हुई प्रतिभा को बहिर्मुखी बनाकर व्यक्तित्त्व निमार्ण हेतु यहाँ विभिन्न गतिविधियाँ वर्शपर्यन्त चलती रहती हैं। समय प्रबन्धन, समूह प्रबन्धन, कार्यक्रम प्रबन्धन, सौन्दर्य बोध,

समाज सेवा के विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से बालकों में समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का विकास-

  • कच्ची बस्तियों में साक्षरता अभियान।
  • सामुदायिक भवनों में कमजोर छात्रों हेतु विषिश्ट अध्ययन की व्यवस्था।

नियम

  • सभी शुल्क प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जमा करवाना अनिवार्य हैं।
  • सभी शुल्क बारह मास के लिए निर्धारित हैं। एक बार जमा शुल्क पुनः देय नहीं होगा।
  • वर्ष के बारह माह का शुल्क आठ माह में देय होगा। यह शुल्क प्रत्येक फरवरी तक पूर्ण रूप से देय होगा।
  • यह अभिभावकों का उत्त्तदायित्व होगा कि सभी प्रकार के शुल्क निर्धारित समय में ही जमा हो ऐसा न होने पर विद्यालय प्रषासन बालक का नाम विद्यालय पंजीयन से निरस्त कर सकेंगे।
  • नामांकन निरस्त होने की स्थिति में पुनः प्रवेष प्रक्रिया अनिवार्य होगी।

स्थानान्तरण

स्थानान्तरण की स्थिति में सभी निर्धारित षुल्क जमा होने पर पन्द्रह दिन के अन्दर सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण करने पर थानान्तरण स्वीकृति मिल सकेगी।

स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र

विद्यालय छोड़ने पर छात्र सभी प्रकार के बकाया पूर्ति करके कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर

उपस्थिति

प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रत्येक दृष्टि से 90 प्रतिषत उपस्थिति अनिवार्य हैं।

प्रवेष रद्द प्रक्रिया

किसी भी विद्यार्थी को विद्यालय प्रषासन निम्न अनुषासनहीनता के कारण उसका प्रवेष रद्द कर सकता हैं-

  • अनुषासनहीनता, अवांछित व्यवहार
  • विद्यालय व्यवस्था के विपरीत व्यवहार की स्थिति में।
  • शुल्क अदायगी न होने पर।
  • सात दिन एवं अधिक की अनुपस्थिति की स्थिति में।

अवकाष

  • विद्यार्थी को अवकाष अति आवष्यक होने पर लिखित प्रार्थना पत्र (दैनन्दिनी अनुसार) की पूर्व स्वीकृति पर ही मान्य होगा ।
  • प्रार्थना पत्र पूर्व में प्राचार्य से स्वीकृत करवाना होगा।
  • रूग्ण अवस्था में चिकित्सक द्वारा मेडिकल प्रमाण पत्रदेने पर अवकाष देय होगा।

विद्यालय गणवेष

विद्यालय द्वारा प्रस्तावित गणवेष ही मान्य होगा। बालकों में समानता एवं एकरूपता हेतु विद्यालय में तीन प्रकार के गणवेष की व्यवस्था हैं। इस हेतु अलग से सूचना कार्यालय द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं।

प्रवेष प्रक्रिया

पंजीकरण

  • प्रवेष पत्र में सभी प्रविश्ठियों को ठीक से अंकित करने के बाद कार्यालय में पंजीकरण षुल्क निर्धारित तिथि तक जमा करवाना होगा।
  • कार्यालय द्वारा एक रसीद एवं पंजीकरण क्रमांक दिया जायेगा।
  • अभिभावक विद्यालय कार्यालय से सम्पर्क कर प्रक्रियानुसार विवरणिका प्राप्त कर सकते हैं तथा विद्यालय के बारे में विषेष जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आगन्तुक

विद्यालय समय में मिलने वाले अभिभावक एवं आगन्तुक पूर्व निर्धारित (कैलेण्डर एवं डायरी अनुसार) समय पर ही मिल सकेंगे।