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About Us

सर्व मंगल मांगल्ये षिवे सर्वार्थ साधिके।
षरण्येत्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।

आलोक ज्ञान की वह ज्योति है जिसमें आदि के वेद से लेकर अद्यतन विज्ञान का प्रकाष समाहित है। जहाँ इसकी जड़ें भारतीय संस्कृति से पोषित है वहीं इसके परिवेष में तकनीकी गहराइयों से विज्ञान फलीभूत है। बालकों की अन्तर्निहित शक्तियों को निखारना व उसे उन्मुक्त अभिव्यक्ति देना हमारा संकल्प है।

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित उदयपुर की ऐतिहासिक नगरी, अरावली से आच्छादित झीलों की इस नगरी में उसी संकल्प के साथ आलोक संस्थान की स्थापना 29 जून, 1967 में हुई। प्रारम्भिक विद्यालय की स्थापना के साथ ही आज संस्थान एक वृहद् शैक्षिक-शैक्षणेत्तर गतिविधियों का केन्द्र है।

अध्यापन हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार (सन् 1984) से अलंकृत संस्थान के संस्थापक श्री श्यामलाल कुमावत एक दूरदर्शी, दृढ़ संकल्प से युक्त, इच्छाशक्ति के धनी एवं शिक्षाविद् हैं। व्यावहारिक, मूल्यपरक व संस्कारक्षम शिक्षा ही आपका मूल मंत्र है तथा भारतीय मूल्यों से ओतप्रोत शिक्षा ही आपके तंत्र का आधार है। भारतीय-मूल्यों से परिपूर्ण शिक्षा में वर्तमान आवश्यकतानुसार तकनीकी शिक्षा के साथ शारीरिक शिक्षा को भी आप अति आवश्यक अंग मानते हैं। शिक्षा में सतत् नवाचार व अभिनवन चिन्तन आलोक का है। आलोक को गुरू के रूप में स्थापित करके श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण प्रमुख उद्देष्य है। आपके ही अथक प्रयासों का परिणाम है कि आलोक का वर्तमान स्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर अपने नव प्रयोगों के कारण एक श्रेष्ठ स्थान पर सुशोभित है।

आलोक संस्थान की हिन्दी माध्यम शाखा आलोक सीनियर सैकण्डरी विद्यालय, फतहपुरा की स्थापना 1984 में हुई। ज्ञान के आलोक को आलोकित करता आलोक फतहपुरा परिवार आज वहाँ खडा़ हैं जहाँ वह अतीत के सुनहरे पलों को याद कर सकता हैं। इन बीते वर्षों की ये स्वर्णिम यात्रा अनेक उपलब्धियों से भरी पडी़ हैं। इन वर्षों में शैक्षिक, साहित्यिक, सामाजिक, खेल आदि सभी क्षेत्रों में यहाँ के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का नाम रोषन किया हैं। आलोक फतहपुरा के इस स्वर्णिम सफर में भागीदार बना हैं अध्यापकों का समूह व हजारों छात्र जिनके प्रयासों ने आलोक को आज यह जीवंतता प्रदान की हैं।

आलोक फतहपुरा की स्थापना उन स्थितियों में हुई जब आलोक के अभिभावकों ने एक हिन्दी माध्यम शाखा की स्थापना का सुझाव दिया। ऐसे में आलोक संस्थान के संस्थापक परम् श्रद्वेय श्री श्यामलाल जी कुमावत की वह दूरगामी सोच रंग लाई और पृथक हिन्दी माध्यम शाखा की महता को स्वीकार करते हुए फतहपुरा में हिन्दी माध्यम शाखा जो माध्यमिक षिक्षा बोर्ड, राजस्थान से सम्बद्वहैं कि स्थापना का मार्ग प्रषस्त किया तब से लेकर आज तक उस स्वर्णिम सफर की जो शुरूआत 1984 में हुई आज उसे आलोक संस्थान के निदेषक युवा, कर्मठ व सृजनषील व्यक्तित्व डाँ. प्रदीप जी कुमावत नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं जिनके निर्देषन में आलोक फतहपुरा उतरोतर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।

केन्द्र सरकार की संस्था “नीपा” ने भी अपनी रिपोर्ट में राजस्थान के 20 श्रेष्ठ उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आलोक फतहपुरा को सातवाँ स्थान दिया

सह-शैक्षिक गतिविधियाँ

  • विशेष प्रार्थना सभा
  • खेलकूद, शारीरिक शिक्षा, तैराकी, शैक्षिक भ्रमण, शिविर एवं सरस्वती यात्राएँ।
  • साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियाँ, वाद-विवाद, नृत्य-संगीत आदि।
  • सदन/छात्रसंघ व्यवस्था, जागृति मंच, समाजोपयोगी उत्पाद सेवा कार्य शिविर।
  • अधिकतम छात्रों को अधिकतम कार्य, नेतृत्व विकास।
  • विज्ञान एवं कला, कठपुतली द्वारा अभिव्यक्ति।
  • प्रोजेक्ट (परियोजना) कार्य योजना।
  • युवा सप्ताह, विज्ञान प्रदर्शनी एवं विषयानुसार क्लब।
  • नववर्ष चैत्र शुक्ला प्रतिपदा।
  • अभिभावक-अध्यापक सम्पर्क।

उद्देश्य

  • राष्ट्र को समर्पित नई पीढ़ी का निर्माण।
  • चरित्रवान और श्रेष्ठ युवकों का उत्तरदायित्व निर्माण।
  • छात्र-छात्राओं में आत्मनिर्भरता एवं स्वावलम्बन के मूल्यों का विकास करना।
  • शारीरिक, शैक्षिक व नैतिक दृष्टि से सक्षम पीढ़ी का निर्माण जो वर्तमान चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
  • छात्रों के व्यक्तित्व का निर्माण उनके अन्तर्निहित सृजनात्मक शक्तियों के विकास के साथ मानवता एवं राष्ट्र सेवा को समर्पित छात्रों का निर्माण करना।
  • मानवता एवं मातृभूमि की सेवा के लिए